चाँदनी हैं बेटियां

गीतिका

शान भारत की रही हैैं बेटियां।
लाज घर की आज भी है बेटियां।।

कोख में ही मार देते क्यों उसे।
फूल सी नाजुक कली हैं बेटियां।।

दाँत खट्टे दुश्मनों का कर रही।
सरहदों पर जा लड़ी हैं बेटियां।।

देख नतमस्तक हुआ सारा जहां।
काम ऐसा कर रही हैैं बेटियां।।

धन के लालच में जला देते बहू।
घर की लक्ष्मी भी यही हैं बेटियां।।

जुल्म इन पर तुम कभी करना नहीं।
दुर्गा है तो काली भी हैं बेटियां।।

चोटियां चाहें हिमालय की कहों।
फांद डाली शेरनी हैं बेटियां।।

मत कहो अबला ज़माने में उसे।
आत्मनिर्भर बन गयी हैं बेटियां।।

बात सच्ची कह रही अंशू यहां।
चाँद बेटा चाँदनी हैैं बेटियां।।
   ©अंशु कुमारी.

         

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