नववर्ष

काव्य सृजन १७६
विषय नव वर्ष
तिथि १८.३.१८
वार रविवार

लो फिर आ गया नववर्ष मुस्कराता हुआ,
मंगलमय सुखद सुन्दर प्रीत बरसाता हुआ।

सफलता कदम छूएं न कोई हो गिला शिकवा,
उम्मीदों से पूर्ण हो और हमें आगे बढाता हुआ।

द्वेष घृणा को त्याग प्यार की होली खेलें…..,
जीवन में मिले खुशियां,जश्न मनाता हुआ।

खिले वादियों में पुष्प और कलियां चहूंओर
श्रृंगार धरा का हरियाली से लहराता हुआ।

भारत मां का दिल से वंदन अभिनंदन…..,
हर ओर नैतिकता आदर्श का परचम फहराता हुआ।।

डॉ राजमती पोखरना सुराना
भीलवाडा राजस्थान
साहित्य _सागर

         

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