इक शख़्स

होकर दूर हमसे, वो महलों में सज रहा है
इक मोती जो समंदर से निकाला था हमने

करके अँधेरा यहाँ, वो वहाँ चमक रहा है
इक तारा जो आसमान से उतारा था हमने

बनाकर दूरियाँ वो, वहाँ खुश्बू बिखेर रहा है
इक फूल जो अपने बाग़ में उगाया था हमने

उजड़ कर भी वो, देखो वहां बस गया है
इक शख्स जिसे दिल में बसाया था हमने

         

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