क्रांति चलनी चाहिए।

रो रहा है देश मेरा आँसू पोछनी चाहिए
देश के अंदर फिर से क्रांति चलनी चाहिए।

चारो तरफ लूट मार है और हंगामा बरपने लगी
भ्रष्टाचारी के खिलाप एक युद्ध चलनी चाहिए।

देश के अंदर फिर से क्रांति की लहर दौड़ने लगी
शोषण के विरुद्ध फिर से क्रांति चलनी चाहिए।

नेता सब भूल जाते आते है वो सत्ता में जब
अपने ही वादे का परत दीवार हिलनी चाहिए।

भाई भतीजवाद बढ़ रहा है,गरीब की चिंता नहीं
ऐसे लोगों के खिलाप एक लहर चलनी चाहिए।

रचनाकार-रंजन कुमार प्रसाद ( माध्यमिक शिक्षक )

         

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