जग लगता पागलखाना है

जिनको अपने नेह से साथी मिलने जाना है
उनको तो सारा जग लगता पागलखाना है

अक्सर पागल सा वो लड़का हँसता रहता है
लगता है उसकी आँखो का दर्द पुराना है

चाहता के जग धोखा खाकर ऐसा लगता है
हर कोई मुझको दुनियाँ में लगे सयाना है

पग पग पर ईश्वर ने जग में पर्दे डाले है
हर पर्दे के बाहर का हर शख्स अंजाना है

अक्सर रातो में जो लड़का जागता रहता है
कोई कहे कुछ भी लेकिन पागल दीवाना है

तन्हाई के आलम में भी जिसने साथ नही छोड़ा
कोई नही वो प्यार मेरा जाना पहिचाना है

तपती दुपहरी में जिसके पाव नही थकते राधे
उस इंसान को इस जीवन की मंजिल पाना है

Rishabh Tomar

         

Share: