अबके फागुन में…..

 

अबके फागुन में प्रियतम मैं एक अनूठा फाग लिखूं,
तेरे और मेरे इश्क की एक नई दास्तान लिखूं।

धानी चुनर ओढ़ कर मैं फागुनी बयार में इठलाऊं,
अधरो पर नाम ले तेरा इश्क की नव बहार लिखूं।

तन भीगा मन‌ भी भीगा, भीगी कुछ पलकें मेरी,
बहकते मन से भीगे मन से तू कहें तो नवगान लिखूं।

घटाओं में छा जाये तेरे प्यार की गुलाबी महक,
गुलाबी लबों को चूम इश्क की नव मिसाल लिखूं।

तेरी प्रीत के रंगों में रंग शरमाऊं,घबराऊ,
मांग में इश्क का लाल सिंदूर भर प्यार का अहसास लिखूं।

गुलाल अबीर गालों पर हौले हौले से मलकर,
शरमाते हुए तेरे नैनों में अपना प्यार ही प्यार लिखूं।

बासंती हवाओं में अधरो पर नाम तेरा ही आता है,
कानों में घोल मधुरस मैं तेरे नाम अपने सारे मधुमास लिखूं।।

डॉ राजमती पोखरना सुराना भीलवाडा राजस्थान

         

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