अहसास कुछ खास

प्रेम का एहसास है कुछ खास
समझ लेता है हृदय नयनों की भाष।
कुछ तो पा ही लेते हैं प्यार की मंजिल
कुछ तड़पते हुए बनजाते हैं बस ज़िंदा लाश।

प्रीत की रीत से चाहत का दीप सुनो,
नव निर्मल एहसास लिए जलता है।
सुन, वजूद प्रेम के होने का,
नित नई आस लिए पलता है।

सुन, एक एहसास प्यार के होने का
जड़ जीवन में भी जीवन संचार करता है।
सुगंध से प्रेम की हर प्राणी का जीवन
बसंत सी खुशियों सम अनंत अपार भरता है।

चांद की चांदनी सा नीलम नहीं है प्रेम सुनो,
यह वो नौका है जो डूबी तो सहारा न मिले।
हो सकता है भव पार तुम भी हो जाओ,
यह वो झोंका है कि पास होके भी किनारा न मिले।

नीलम अब छोड़ भी दे तू प्रेम प्रीत का चक्कर
तुझको न रास यह एहसास कभी आएंगे।
ये ज़रूरी नहीं कि सब चाहें तुमको तेरी तरह
लोग तो लोग हैं औकात भी तो अपनी ही दिखाएंगे।

नीलम शर्मा

         

Share: