करवाचौथ

करवाचौथ

सुनो,चाँद,विधु,सुधाकर,कलानिधि, निशापति, शशांक।
तुम चन्द्र हो चांदनी निशा के और मेरे पिया हैं मेरे मयंक।
साज-श्रृंगार मेरे साजन से,खुमार शुमार रहता साजन से।
घर परिवार सभी साजन से,प्यार बयार बहती साजन से ।

हे पूनम सुहास चंद्रमा सातों जन्म के साथ का वर देना ।
हे रजनी उजास चांद तुम नीलम अंबर पर सु-दर्शन देना।
रचा सुमेहंदी हथेलियों पर और कर सजे कंगन के साथ
ओढ चुनर प्रीत रंग की,थाम पूजा थाल और करवा हाथ।
मांगूंगी तुमसे मोहक विधु, रहे संजय-नीलम सदैव साथ।
आयुष्मान पिया को कहना,हर सुहागन की रखना बात।
सुनो,चांद तुम जल्दी आना,करना महसूस सबके जज़्बात

नीलम शर्मा

         

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