तुम से प्यार करता हूं

इश्क में तेरे डूब कर, खता हर बार करता हूं,
मोहब्बत है तुमसे बस तुम से ही प्यार करता हूं।

ख्वाबो में तुम्हें पा कितना हड़बड़ा जाता हूं,
समंदर की लहरों में,हर लम्हा लम्हा बहता हूं।

जुदा हो कर तुमसे हम, छिप छिपकर कितना रोये,
उन्हें क्या पता कि मैं उनकी पलकों पर बसता हूं।

तुम्हारे रूठने के अंदाज़ को, नजर अंदाज किया,
हदें पार कर अपनी दास्तां सुनाने से डरता हूं।

चांद हो तुम मेरे लिए पर कब तुम मेरे साथ रहें,
तुम तो हो उस पार और मैं इस पार रहता हूं।

फितरत दिल की मेरी, देख कर तुझे बदल रहीं हैं,
धुंधली यादों में खो तेरी , हर पल तड़पता हूं।

कितने अज़ीज़ थे मेरे तुम, ग़म भी तुम ने कम नहीं दिये,
उम्मीद मत करना मुझसे,कि तुम पर मरता हूं।।

डॉ राजमती पोखरना सुराना भीलवाडा राजस्थान

         

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