रश्में उल्फ़त

दिल किसी से जब लगाना चाहिए।
रश्में उल्फ़त भी निभाना चाहिए।।

प्यार में रूसवाईया भी गर मिले
अश्क आँखो में न आना चाहिए।।

इस ज़माने को न हो जाये खबर।
आह दिल में ही दबाना चाहिए।।

बेवफ़ा उस बेरहम के प्यार में।
दिल नहीं अपना जलाना चाहिए।।

ग़मजदा हो कर जियेंगेे कब तलक।
भूल ग़म को मुस्कुराना चाहिए।।

ज़िन्दगी अनमोल होती है बहुत।
यूं नहीं इसको गंवाना चाहिए।।

इस मुहब्बत ने दिये जो ग़म अंशू।
भूलने को इक ज़माना चाहिए।।
    ©अंशु कुमारी

         

Share: