खेला बहुत है

मेरे जज़्बात से खेला बहुत है
सुधर जा यार बस इतना बहुत है

अभी से आज से मेरा नही तू
कि मेरा एक दिन कहना बहुत है

नही कुछ भी नही है लुत्फ़ तुझमें
तुझे ए! ज़िन्दगी सोचा बहुत है

बता कैसे करू तुझपे यकीं अब
यही सच है कि तू झूठा बहुत है

किसे कितना बताना है मुनासिब
अदाकारी अभी करता बहुत है

असर तुझपर कभी ना अब पड़ेगा
लकी इस बार तो टूटा बहुत है

         

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