दर्द को दिल में छुपाना आ गया

दर्द को दिल में छुपाना आ गया
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दर्द को दिल मे छुपाना आ गया ।
रोक आँसू मुस्कुराना आ गया ।।

हो गया ऐसा असर है इश्क़ का
चैन दिल का भी चुराना आ गया ।।

ख़्वाब फिर हैं नैन में सजने लगे
फिर लबों को गुनगुनाना आ गया ।।

राह मंजिल की कठिन बतला रहे
पाँव उन को भी बढाना आ गया ।।

चीर कर छाती हिमालय की हमें
नीर गंगा में बहाना आ गया ।।

बोलियाँ लगने लगीं जज़्बात की
उफ़ है ये कैसा जमाना आ गया ।।

अब भरम कोई ज़माने का नहीं
यार अब अपना ठिकाना आ गया ।।
—————-डॉ. रंजना वर्मा

         

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