बुलाता है तुम्हें ये मन चले आओ चले आओ

बुलाता है तुम्हें ये मन चले आओ चले आओ।।
कहीं उजड़े न ये गुलशन चले आओ चले आओ।।

तुम्हारे कहकहे से ही मिरा घर बार रौशन था।
बुलाता है तुम्हे आँगन चले आओ चले आओ।।

बुलावा आ गया मेरा बहुत ही दूर जाना है।
हुआ अब ख़त्म ये जीवन चले आओ चलें आओ।।

तुम्हारी याद में हर पल मिरी आँखे बरसती है।
कहां तक बरसे ये सावन चले आओ चलें आओ।।

तुम्हारे ही लिये हम ने बचा रक्खी है कुछ सांसें।
बहुत खाली है ये उपवन चले आओ चलें आओ।।

बची हैं चंद सांसें ही अब अंशु के भी जीवन की
अगर समझो कोई बंधन चले आओ चलें आओ।।
अंशु

         

Share: