सूखी रेत का दरिया

मैं कैसे बताऊँ जाकर उन्हें अब
कि वही तो है मेरे ग़म का ज़रिया
मैं उदास राहों का हूँ एक मुसाफिर
और मेरा दिल सूखी रेत का दरिया

मेरे दिल के सुकूँ को अब छीनकर
कहते हैं वो कि है सब यहां बढ़िया
कैसे कहूँ उनसे कि तुमने कर दिया
है ये मेरा दिल सूखी रेत का दरिया

यादों के भंवर में जब डूबता हूँ मैं
तो याद आते हैं वो हँसते हुए पल
न मैं उनसे मिलता और न बनता
फिर मेरा दिल सूखी रेत का दरिया

         

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