प्रिय अटल बिहारी वाजपेयी जी!

हम नमन हृदय से करते हैं।

नम नयनों से अनायास ही,
अश्रु विकल होकर गिरते हैं।
हम नमन हृदय से करते हैं।।

हे जन नायक ! हे महाप्राण!
तज देह चले करने प्रयाण।
क्या ब्रह्मलीन यूँ हो जाना?
क्या सम्भव ऐसे सो जाना?
जो बीज प्रेम के बोते हैं,
वह महापुरुष कब सोते हैं?
जो पीड़ा सबकी हरते हैं,
वह कभी नहीं फिर मरते हैं।
हम नमन हृदय से करते हैं।।

तुम दिनकर तुमसे उदयाचल,
तुम देवों के प्रिय लाल कमल।
तुम ही भगवा की दिव्य प्रभा,
तुमसे ही उज्ज्वल हुई विभा।
तुम अमर अटल परिभाषा हो,
हर दीन-हीन की आशा हो।
भारत गौरव अनमोल रत्न!
पुष्प स्वयं तुम पर झरते हैं।
हम नमन हृदय से करते हैं।।

भारत माता के वीर लाल!
उन्नत है तुमसे राष्ट्र-भाल।
निज बोली भाषा को पूजा,
तुम जैसा कौन यहाँ दूजा?
शक्तिपुंज होकर संघर्षी,
पूज्य रहोगे हे समदर्शी !
यहाँ कौन आलोचक बोलो ?
श्लाघा ही जन-जन करते हैं।
हम नमन हृदय से करते हैं।।

कविता भूषण विश्व प्रणेता,
सरल हृदय प्रिय अनुपम नेता।
सौम्य रूप मुस्कान मनोहर,
मुग्ध हुई वागीशा तुम पर।
पंचतत्व से निर्मित तन-मन,
माना नश्वर है जीवन- धन।
पर अटल सत्य को झुठलाते,
जग में अमिय सदा भरते हैं।।
हम नमन हृदय से करते हैं।।

शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

         

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