बहुत सीधा मेरा दिलबर

बहुत सीधा मेरा दिलबर नहीं शौक़ीन लगता है
थोड़ा चुपचाप रहता है थोड़ा ग़मगीन लगता है ।
है उसकी दोस्ती न्यारी है मुझको जान से प्यारी
ज़रा वो मुस्कुरादे तो बहुत वो हसीन लगता है

वो रूठे मैं उसको मनालूँ या रूठा रहने दूँ
वो हसीं गुस्से में भी या रब बड़ा नमकीन लगता है
वो रोता है तो मैं रोदूँ वो हँसे तो मैं भी हँस दूँ
मेरे चेहरे का हर भाव उसके अधीन लगता है

वो कहता हो चाहे हर दुआ के बाद जो कुछ भी
उसका न भी कहना या खुदा आमीन लगता है
मैं जो बोलूँ और वो न बोले ये उसकी हसीं अदाये हैं
जो कोई और न बोले तो हमें तोहीन लगता है

नीलम शर्मा

         

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