“मैं खुश हूँ”…

°°°
बना जो अब तक ज़हान में क़ाबिल , मैं खुश हूँ ।
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
.
हर क्षण अपनी मस्ती में आता-जाता रहा ,
मगर अहसास तो पल-पल में भरमाता रहा ।
ग़म औ खुशी दोनों मुझमें शामिल , मैं खुश हूँ ,
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
.
मुट्ठी से रेत जैसा उम्र फिसलता रहा ,
साल-दर-साल कभी गिरता , कभी उठता रहा ।
मगर ख़ुद को कभी माना न ज़ाहिल , मैं खुश हूँ ,
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
.
रिश्तों से मिल गया कभी मुस्कान तो कभी अश्क़ ,
किसी से पाया शाबासी तो किसी से रश्क़ ।
आखिरकार मात खाया हाइल * , मैं खुश हूँ ,
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
.
किसी की अपेक्षा में खरा भी उतरना हुआ ,
तो किसी की उपेक्षा से धीरे चलना हुआ ।
फिर भी ज़िंदगी यूँ कर गयी माइल * , मैं खुश हूँ ,
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
.
रब से गुज़ारिश है , आशीष बरक़रार रहे ,
जो ख़ास हैं , उनका हर पल मिलता प्यार रहे ।
वक़्त होता है सच में दरियादिल , मैं खुश हूँ ,
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
.
बना जो अब तक ज़हान में क़ाबिल , मैं खुश हूँ ।
हुआ जो अब तक ज़िंदगी से हासिल , मैं खुश हूँ ।।
°°°
* हाइल = बाधा
* माइल = आकर्षित
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 06/02/2019 )

         

Share: