शुभ दीपोत्सव

🕯।।शुभ दीपोत्सव।।🕯
💥💥💥💥💥💥💥

अवध हँसे सरयू मुस्काये।
रामचन्द्र वापस घर आये।।

पात-पुष्प पल भर में महके।
घर – आँगन चौबारे चहके।।
गहन अमावस की रजनी में,
खिले गात जो थे कुम्हलाये।
अवध हँसे सरयु मुस्काये।।
रामचन्द्र वापस••••••••••।।

ओझल होकर चंद्र गगन से।
देख रहा मन मुदित नयन से।।
अखिल अवनि पर दिव्य पुरुष को,
अगणित रवि-शशि नखत छुपाये।।
अवध हँसे सरयू मुस्काये।।
रामचन्द्र वापस•••••••••••।।

रीति – नीति आदर्श प्रणेता।
सत्य – धर्म के सदा विजेता।।
अति अनुरागी वैभव-त्यागी,
हर प्राणी को गले लगाये।।
अवध हँसे सरयू मुस्काये।।
रामचन्द्र वापस••••••••••••।।

पाकर जीवन मंगलकारी।
धन्य हुए हैं सब नर-नारी।।
सियाराम के बन अनुगामी,
प्रेम-भक्ति नित हृदय-बसाये।।
अवध हँसे सरयू मुस्काये।।
रामचन्द्र वापस••••••••••।।

विह्वल होकर जगत पुकारे।
राम – राम श्रीराम हमारे।।
अभिनंदन आराधन ऐसा,
घर-घर घी के दीप जलाये।।
अवध हँसे सरयू मुस्काये।।
रामचन्द्र वापस•••••••••।।

शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

         

Share: