सावन में छाई हरियाली……

हरियाली गीत
सावन में छाई हरियाली हरियाली……

बनी बींदणी विरह, विरहिन की,गूंजी हिबड़ा मधुर शहनाई,
छम -छम नाचे मन की मोरणी,रे जैसे बिरखा सुखद बरसाई
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

(२)

ज्वलंत विरह से मिली है मुक्ति, होगा हर पल-क्षण सुखदाई,
देखो धरिणी बणी सुहागन, है जागी कान्हा मन करुणाई।
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

(३)

पिया मिलन के चाव संजोए, बणकै बसंती, उमंग हर्षाई,
पतझड़ रूपी,रूखे उपवन में, प्रीति बन बहार आज छाई।
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

(४)
बिंदिया-बोरला,बिलिया-बंगड़ी,छम छम पैंजनिया छमकाई,
नीलम चंद्र ने आके धरा पे,गौरी को, तारों जड़ित चुनरिया उढाई।
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

(५)

दुखद दिवस बिसार सखी री,है रुत पीया मिलन की आई,
सुखद स्मृतियां महंकेंगी सजन संग,सुन,तेरे भी अंगनाई……..
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

(६)
हरे भरे प्रकृति परिवेश में देखो, कुहके कोयल काली
अम्बुजा आम और निमवा निबोरी, महके डाली डाली
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

(7)
तात-मात,भाई,बहन, प्रियजन, मिल मंगल बधावो  गाई,
सदा-सौभाग्य डोली में ‘नीलम’,आज होगी सहर्ष विदाई।
सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली

नीलम शर्मा

         

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