आयु के घट रीते अपने

आयु के घट रीते अपने
चाहे मन खुश हुआ उदास |
भुला न देना प्रीतम अपनी
प्रथम प्रीत का वह अहसास |
***
पहली पहली बार चखा था
मधुर प्रेम का मीठा स्वाद |
सुधियों के साजों पर गूंजे
प्रीत भरा वह अनहद नाद |
कहाँ भूल पाया मैं अब तक
तेरा निरंतर बतियाना ,
कभी कभी ले विषय अनर्गल
हुआ परस्पर वाद विवाद |
धीरे धीरे पनप गया था
आपस में गहरा विश्वास |
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भुला न देना प्रीतम …….
***
कुछ समाज के बंधन भी थे
कंटक प्रीत की राहों में |
प्रीत हमारी खटक रही थी
परंपरा की निगाहों में |
मैंने तेरी इन आँखों में
जलता देखा प्रीत दीया
इसीलिये सौंपा था अपना
जीवन तेरी पनाहों में |
चिंता सारी दूर हुई फिर
होने लगा प्रीत आभास |
***
भुला न देना प्रीतम …….
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यदि विश्वास अटल अपना हो
बाधाएं होती काफूर |
साहस धीरज और यत्न से
सभी मुसीबत होती दूर |
हारों में भी जीत छुपी है
अगर जपे यह मन्त्र कोई
प्रीत सम्बधित हो या दूजा
नहीं सपन हो चकनाचूर |
अभिलाषा हर पूरी कर हम
भरें ज़िंदगी में उल्लास |
***
भुला न देना प्रीतम …….
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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