“तुझे संसार कहूँ”…

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तुझे सच्चा यार कहूँ या मेरा प्यार कहूँ ।
तुझे संसार कहूँ या इस दिल का तार कहूँ ।।
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मेरी शान तू , ईमान तू , अरमान भी तू ,
मेरी साँस तू , धड़कन तू और जान भी तू ।
तुझे खुशी कहूँ या फिर मौसमे-बहार कहूँ ,
तुझे संसार कहूँ या इस दिल का तार कहूँ ।।
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ज़िंदगी के रस्मों का एक अनमोल अंग हो ,
खुशनसीब हूँ जो तुम मेरे हर पल संग हो ।
हसीं सुबह कहूँ या या फिर शाम का क़रार कहूँ ।
तुझे संसार कहूँ या इस दिल का तार कहूँ ।।
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मैं अगर पन्ना हूँ तो तुम पूरी किताब हो ,
चाहत के आँगन में मुस्कान बेहिसाब हो ।
तुझे अज़ान कहूँ या प्रेम का दरबार कहूँ ,
तुझे संसार कहूँ या इस दिल का तार कहूँ ।।
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ग़म नहीं , अगर तेरी बाँहों में गुजरे शाम ,
वरना “कृष्णा” लगा दे साँस पे हर इल्ज़ाम ।
तुझे आस कहूँ या जीने का आधार कहूँ ,
तुझे संसार कहूँ या इस दिल का तार कहूँ ।।
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तुझे सच्चा यार कहूँ या मेरा प्यार कहूँ ।
तुझे संसार कहूँ या इस दिल का तार कहूँ ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 19/08/2018 )

         

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