तेरा श्रृंगार करूँ

नयनों में तुम बसने वाली आओ तुम्हें मैं प्यार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करूँ

माथे बीच लगाकर बिंदी ,भाल पलास का फूल करूँ
मांग सजा सिंदूर से तेरी, तुमको जीवन मूल करूँ
प्रेम अधूरा था अब तक ये आओ इसे साकार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करूँ

बालों में गजरा फूलो का, चंदन की खुश्बू डालूँ
नैनो में काजल के संग में , काली घटा बिछा डालूँ
जैसा अब तक नही किया है वैसा तुम्हें दुलार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करूँ

ढलते और निकलते सूरज सा अधरों को लाल करूँ
सावन ऋतु की काली घटा से प्रियवर तेरे बाल करूँ
तुम मुझको अपना लो साथी मैं भी तुम्हे स्वीकार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करुँ

हल्दी चंदन का उबटन कर , प्रभा की तुमको लाली करूँ
नाक में शुक सी नथ पहनाकर कान में मछली बाली धरूँ
रतिपति से भी सुंदर लिखकर साँचे सा आकार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करुँ

मंगलसूत्र बांधकर तेरे,पैर महावर लाल करू
मेहँदी हाथ साजकर तेरे ,लाल गुलाबी गाल करूँ
सात जन्म का बंधन करके साथी आज करार करूँ
कोटि चंद्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करूँ

अमल धवल गिरि के शिखरों सा आज तेरे ये बदन सजे
चूड़ी पायल बिछिया की झंकारों से इक साज सजे
कंगन ,अंजन ,चंदन के संग तेरा रूप विस्तार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करूँ

फागुन के संग,हल्दी के रंग सरसो सा इक रंग धरूँ
मांग मध्य भाल के ऊपर प्यार भरा सिंदूर धरूँ
पास बुलाकर तुमको प्रियवर खुद पर ही उपकार करूँ
कोटि चन्द्र की सुंदरता से आज तेरा श्रृंगार करूँ

ऋषभ तोमर

         

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