“तेरी पनाह में”…

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अच्छा है पल बिताना , अाकर तेरी पनाह में ।
सक़ून क्या है जाना , आकर तेरी पनाह में ।।
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तुम्हारी यादों में डूबा खो जाता हूँ सनम ,
दूर सही मगर दिल के करीब पाता हूँ सनम ।
अब कैसा घबराना , आकर तेरी पनाह में ?
सक़ून क्या है जाना , आकर तेरी पनाह में ।।
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इश्क़ बस लिखने में आसान बेशक लगता है ,
मगर महसूस करो तो मन कुछ और कहता है ।
सीखा प्रेम-तराना , आकर तेरी पनाह में ,
सक़ून क्या है जाना , आकर तेरी पनाह में ।।
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तेरी शख़्सियत का जादू और ये अपनापन ,
अच्छा लगता हर पल मीठी अहसासों का छुअन ।
भूला सारा ज़माना , आकर तेरी पनाह में ,
सक़ून क्या है जाना , आकर तेरी पनाह में ।।
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ज़िंदगी में “कृष्णा” को अब तक जो मिला , कम नहीं ,
तुम ज़िंदगी में हुई शामिल , तो कुछ भी ग़म नहीं ।
जाना कष्ट भुलाना , आकर तेरी पनाह में ,
सक़ून क्या है जाना , आकर तेरी पनाह में ।।
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अच्छा है पल बिताना , आकर तेरी पनाह में ।
सक़ून क्या है जाना , आकर तेरी पनाह में ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 06/04/2019 )

         

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