“तेरे नाम के सिवा”…

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अब क्या करें फ़रियाद , तेरे नाम के सिवा ।
रहता नहीं कुछ याद , तेरे नाम के सिवा ।
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तेरे खिलाफ़ किसी से कुछ भी सुन न पाऊँ ,
बगैर तेरे इक हसीन ख़्वाब बुन न पाऊँ ।
भूलता हर संवाद , तेरे नाम के सिवा ,
रहता नहीं कुछ याद , तेरे नाम के सिवा ।
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तेरी-मेरी रूह का एक अज़ब रिश्ता है ,
अपनी साँसों में चाह का ज़ज़्बा बसता है ।
इश्क़ को मिले नहीं दाद , तेरे नाम के सिवा ,
रहता नहीं कुछ याद , तेरे नाम के सिवा ।।
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सुक़ून मिल जाए , दिल में आ के बस जाना ,
अच्छा महसूस हो , बात ज़रूर बतलाना ।
कोई न ज़िंदाबाद , तेरे नाम के सिवा ,
रहता नहीं कुछ याद , तेरे नाम के सिवा ।।
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“कृष्णा” की निराली दुनिया कहाँ है पूरी ?
तुम बिन हर बात लगती है हरदम अधूरी ।
कहाँ दुनिया आबाद , तेरे नाम के सिवा ,
रहता नहीं कुछ याद , तेरे नाम के सिवा ।।
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अब क्या करें फ़रियाद , तेरे नाम के सिवा ।
रहता नहीं कुछ याद , तेरे नाम के सिवा ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 09/04/2019 )

         

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