“मानो कठपुतली हम”…

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तेरी अहसास की खूशबू मानो चंदन-चंदन है ।
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।

तन से फेरे न हुए तो उस बात का कोई ग़म नहीं ,
दूर रहकर भी जीवन भर कभी दूर हुए हम नहीं ।
मन से हो गया हो मानो एक अटूट गठबंधन है ,
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।

हर बात लगने लगा है भरी दुनिया में अलग-सा ,
तेरे अलावा यहाँ कहाँ कोई और लगता जग-सा ?
बातों में गजब का जादू , भले अधरों पे कंपन है ,
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।

तुझे खुश देखकर अपना प्रत्येक दुख भूल जाता हूँ ,
कोई खुशी मिले तो अपने नजदीक तुझे पाता हूँ ।
हृदय धड़कने लगे तो सचमुच तेरा ही स्पंदन है ,
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।

ज़िंदगी को तेरे नाम के साथ मैंने समर्पण किया ,
हर एक बलवती इच्छा को तेरे लिये अर्पण किया ।
तेरी अमिट-अमर छवि का हृदय के अंदर अंकन है ,
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।

ऊपर वाले का खेल भी होता है अद्भुत-निराला ,
वही सपना दिखलाता है और उसने ही है पाला ।
मानो कठपुतली हम “कृष्णा”, दुनिया में बस मंचन है ,
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।

तेरी अहसास की खूशबू मानो चंदन-चंदन है ।
तेरी स्नेहिल प्रीत को मेरा बारंबार वंदन है ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 16/05/2018 )

         

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