“मैं हूँ न”…

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कर लो कुछ भी हिसाब मैं हूँ न ।
तेरी हर बात का ज़वाब मैं हूँ न ।।
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चेहरे पर कभी कोई ग़म न देखूँ ,
तेरी अँखियों को कभी नम न देखूँ ।
तू रहे सदा खुश तो नवाब मैं हूँ न ,
तेरी हर बात का ज़वाब मैं हूँ न ।।
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जो तू सोचे मन हमेशा पढ़ ले ,
तेरे अहसास मेरे भाव गढ़ ले ।
ग़र तू ग़ज़ल तो किताब मैं हूँ न ,
तेरी हर बात का ज़वाब मैं हूँ न ।।
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भूलकर भी कभी रूठना नहीं ,
प्रीत में कोई लकीर खींचना नहीं ।
तेरे बगैर अश्क़ों का सैलाब मैं हूँ न ,
तेरी हर बात का ज़वाब मैं हूँ न ।।
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ये ज़िंदगी अब तेरी ही अमानत है ,
बहुत दूर चली गयी हर शिक़ायत है ।
गुमान हो मेरी , तेरा रूआब मैं हूँ न ,
तेरी हर बात का ज़वाब मैं हूँ न ।।
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कर लो कुछ भी हिसाब मैं हूँ न ।
तेरी हर बात का ज़वाब मैं हूँ न ।।

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— °•K.S. PATEL•°
( 14/01/2019 )

         

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