“ये आँखे”…

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क्या है दिल में , ये टटोलती हैं ।
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।।
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कहना क्या है ज़रा बोल भी दो ,
कुछ राज़ है ग़र तो खोल भी दो ।
सुन लो हर अहसास तोलती हैं ,
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।।
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कहाँ तड़प है , छुपेगी भी नहीं ,
नज़रें पल में हटेगी भी नहीं ।
क़शिश परत-दर-परत खोलती हैं ,
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।।
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खुशी की तलाश हर समय होती ,
आनंद पाकर निश्चिंत ये सोती ।
हो गलत तो भौहें डोलती हैं ,
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।।
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ख़्वाहिश की तार मन से है जुड़ी ,
औ मन की तार तन से है जुड़ी ।
सुन “कृष्णा” प्रेम रस घोलती हैं ,
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।।
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क्या है दिल में ये टटोलती हैं ।
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 09/08/2018 )

         

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