सुनो साँवरे

गीत
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सुनो साँवरे प्यार तुम्हारा जब से आन बसा दिल में ।
बना लिया है प्राप्य तुम्हें है दिल अटका इस मंजिल में ।।

तुम क्या जानो प्रीत प्यार को
निर्मम बन कर भरमाया ,
पहले प्यार जगाया मन में
फिर कहते सब है माया ।

श्याम तुम्हारी इसी अदा ने डाल दिया है मुश्किल में ।
सुनो साँवरे प्यार तुम्हारा जब से आन बसा दिल मे ।।

रूप तुम्हारा झलक रहा है
धरा गगन में उपवन में
प्रतिबिंबित तुम ही मनमोहन
नील झील के दरपन में ।

रहा नहीं कोई आकर्षण तुम बिन सागर साहिल में ।
सुनो साँवरे प्यार तुम्हारा जब से आन बसा दिल में ।।

बजी बाँसुरी अधर सुधा रस
की लेकर मृदु मादकता
तिरछी चितवन सरस तुम्हारी
भरती मन में पावनता ।

उलझ गये हैं नैन तुम्हारे मस्तक के काले तिल में ।
सुनो साँवरे प्यार तुम्हारा जब से आन बसा दिल में ।।
———————————डॉ. रंजना वर्मा

         

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