गीत- खिली रातरानी खुशबू पर

गीत
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याद प्रसून जहाँ खिलते वह सूखी डाली है ।
आज न जाने क्यों मन मेरा खाली खाली है ।।

खिली रातरानी खुशबू पर
हैं सौ सौ पहरे ,
तितली भौंरे इन फूलों पर
लेकिन कब ठहरे ।

हर गुलाब का शूल आज बन गया सवाली है ।
आज न जाने क्यों मन मेरा खाली खाली है ।।

ख़्वाब जगे उम्मीदें जागीं
अरमाँ मचल उठे ,
चिकनी राहें चरण पीर के
जैसे फिसल उठे ।

रात अमावस की घिर आयी कितनी काली है ।
आज न जाने क्यों मन मेरा खाली खाली है ।।

लगा रही तन्हाई घर का
बार बार फेरा ,
बेचैनी ने आ कर द्वारे
डाल दिया डेरा ।

आशा और निराशा सखियाँ प्रीत निराली है ।
आज न जाने क्यों मन मेरा खाली खाली है ।
————————–डॉ. रंजना वर्मा

         

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