मर कर भी न मिटने पाएगी

छायावादी की स्तम्भ महादेवी वर्मा को उनके जन्मदिवस पर उन्हीं की छाप ली हुई एक  रचना जिसे गाया भी है प्रस्तुत करती हूँ,. ,इसी रचना के माध्यम से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूँ

मर कर भी न मिटने पायेगा
मैं ऐसी बनी एक अफसाना
तेरे रहते ओ ऊपर वाले
संसार हुआ मेरा वीराना ।।

कोई आस नहीं,कोई चाह नहीं
टूटे दिल में अरमान नहीं
जब शाखे से ही टूट गयी
मेरी कोई पहचान नहीं
घर द्वार नहीं कोई मेरा,मेरी न जमीं न आसमाँ
तेरे रहते ओ ऊपर वाले संसार हुआ मेरा वीराना

जलती धरती पग के नीचे
सर पर विरहा की धूप पड़ी
हर मंजिल ने ठुकराया है
चौराहे पर चुपचाप खड़ी
ओ जीवन देने वाले बता, इस हाल में स्वरा जाए कहाँ
तेरे रहते ओ ऊपर वाले संसार हुआ मेरा वीराना,,,,,

स्वराक्षी स्वरा

         

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