“ये क्या हो गया है…?”

°°°
बस्तर की वादियों में आजकल ये क्या हो गया है ?
इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।।
.
कभी बसते थे ये गाँव , आज हर तरफ़ है सुनसान ,
ख़ौफ़ इधर , हवा में बारूदी गंध की है फ़रमान ।
खेत सिसक रहा है , जंगल भी आँखें भिगो गया है ,
इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।।
.
क़सूर क्या बच्चों का जो स्कूल जाने से डरते हैं ,
वज़ह मालूम नहीं फिर भी अनेक असमय मरते हैं ।
हाट-बाजार की रौनक सदा के लिये सो गया है ,
इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।।
.
छल से बेक़सूर को मारने में बहादुरी कैसी ?
पीठ पीछे से वार करना बुज़दिली जैसी ।
वीर जवानों की शहादत से हर ज़िगर रो गया है ,
इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।।
.
मौत के इस वहशी खेल को अब छोड़ दो इंसानों ,
चाहे तुम हो नक्सली या राजनीति के परवानों ।
कई दिन से कोई प्रेम का बीज नहीं बो गया है ,
इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।।
.
बस्तर की वादियों में आजकल ये क्या हो गया है ?
इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।।
°°°

         

Share: