आराधना

जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।
हे दया नंदिनी माँ मेरी मैं शीश झुकाने आया हूँ ।।
नहि लाया पूजा की थाली ।
दोनों हाथ हमारे खाली ।।
भावों को लेकर माँ केवल मैं तुझे रिझाने आया हूँ ।
जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।।
मैं बालक अबोध अन्जान ।
करिए मात मेरा कल्यान ।।
समय बेसमय को नहि जानूँ मैं तुझे बुलाने आया हूँ ।
जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।।
जग में कोई रीत नहीं है ।
तेरा जैसा मीत नहीं है ।।
अंतस की पीड़ा को माँ मैं अब तुझे सुनाने आया हूँ ।
जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।।
सबकी बिगड़ी बात बनाती ।
सबको तू है राह दिखाती ।।
असमंजस में पड़ा हुआ हूँ मैं तुझे जगाने आया हूँ ।
जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।।
सब पर तू है प्यार लुटाती ।
घर घर में तू दीप जलाती ।।
मुझको भी इक दीपक दे माँ मैं दीप माँगने आया हूँ ।
जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।।

         

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