उमड़ता जब ह्रदय में प्यार कविता जन्म लेती है

उमड़ता जब ह्रदय में प्यार कविता जन्म लेती है |
प्रकृति जब जब करे श्रृंगार कविता जन्म लेती है |
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नहीं देखा अगर जाये किसी से जुल्म निर्धन पर
बने संघर्ष जब आधार कविता जन्म लेती है |
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हुआ विचलित अगर मन है किसी भी बात को लेकर
गलत जब हो नहीं स्वीकार कविता जन्म लेती है |
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कभी पीड़ा हुई इतनी हुआ सहना जिसे मुश्किल
बहे जब आँसुओं की धार कविता जन्म लेती है |
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नयन देखे अगर मन मोहती कोई कहीं रमणी
लगें बजने ह्रदय के तार कविता जन्म लेती है |
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ज़रूरी हो अगर सरकार की करतूत पर लिखना
बने जब जब क़लम तलवार कविता जन्म लेती है |
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बसंती हो गया मौसम चली होली की’ पिचकारी
मनाते जब भी’ हम त्यौहार ,कविता जन्म लेती है |
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उड़ानें नित्य सपनों की नहीं संभव कि हों पूरी
सपन होते कभी साकार कविता जन्म लेती है |
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‘तुरंत’ अब तक यही देखा दुखों की हो विदाई जब
खुशी के पल मिलें दो चार कविता जन्म लेती है |
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |नोट:-कागज़ दिल पर प्रस्तुत मेरी सभी रचनाएँ मौलिक है |

         

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