“कटा पेड़ रो रहा है”…

°°°
मेरे सुंदर चमन में आजकल क्या हो रहा है ?
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
.
तरक्की की आड़ में ये अनुचित काम हो रहा कैसा ?
प्रकृति की सुध ले कौन , ये अंज़ाम हो रहा कैसा ?
आज परिंदा भी ग़म से अपनी आँखें भिगो रहा है ,
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
.
हसीं मौसम में काली धुएँ का मिलावट रोके कौन ?
कारखानों का प्रदूषण कैसे रूके , सब हैं मौन ?
कटता जंगल , वन्य-जीव सदा के लिए सो रहा है ,
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
.
नदियाँ और ये सरोवर अपना दर्द किसे सुनाएँ ?
कितनी गंदगी अंतस में उड़ेल जाते , किसे बताएँ ?
गंगा को प्रदूषित कर इधर कौन पाप धो रहा है ?
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
.
विडंबना कि पेड़ काटते जन को छाँव नसीब नहीं ,
उसके पसीने सोख ले , ऐसा सुख अब क़रीब नहीं ।
पेड़ काटने के बदले बीज क्यों नहीं बो रहा है ?
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
.
प्रकृति की आँसुओं की कीमत क्या है , सभी जान लो ,
दीर्घायु होना तो वृक्षारोपण का बस ठान लो ।
सुधर जाएगा हालात् फिर “कृष्णा” हो जो रहा है ,
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
.
मेरॆ सुंदर चमन में आजकल क्या हो रहा है ?
बढ़ रही है गर्मी , किनारे कटा पेड़ रो रहा है ।।
°°°
— °•K.S. PTEL•°
( 06/05/2019 )

         

Share: