कवि बनना आसान नही है

थोडा उद्यम करने से गीतकार तो बन सकता है
लेकिन सच पूछो तो यारो कवि बनना आसान नही है।

अंतः घट से रिस रिस करके
क्रंदन स्वर में बहने वाली
कविता तो कवि का सम्बल है
शांति हृदय को देने वाली

कुसुमो की कोमल शैय्या पर मुस्काना आसान बहुत है
लेकिन सच पूछो तो कांटो में हँसना आसान नही है।

गिरती उठती बढ़ती जाती
शैशव बृद्धा और जवानी
तीन स्वरों तक ही सिमित है
जीवन की संक्षिप्त कहानी

मिथ्या सपनो की छाया में दो पल जीना कठिन नही है
पर यथार्थ की ज्वाला में जलते जाना आसान नही है।

गीतकार स्वर लय का ग्राहक
चित्रकार रंग का दीवाना
लेकिन किसने देखा कवि का
दीप शिखा सा जलते जाना

विष घट पीकर जग में कोई नील कंठ तो बन सकता है
लेकिन सच पूछो तो गम का पी जाना आसान नही है।

         

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