बेटी तो बेटी होती है

गीत
——–
बाबा के आंगन की शोभा
माँ के आँचल का मोती है ।
बेटी तो बेटी होती है ।।

माता की कोख पवित्र करे
जो जीवन सुखद विचित्र करे ।
उसके आंचल में गिर गिर कर
बनता अंगारा मोती है ।
बेटी तो बेटी होती है ।।

वह सीता है या सलमा है
वह गीता है या कलमा है ।
जब जब घायल होती अस्मत
आँसू से मुखड़ा धोती है ।
बेटी तो बेटी होती है ।।

लुट जाती है चौराहों पर
मिट जाती मन की राहों पर ।
बनती विभूति कल्याणमयी
धरती बन प्रीति सँजोती है ।
बेटी तो बेटी होती है ।।
—————डॉ. रंजना वर्मा

         

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