सदा दशहरे पर हम फेंकें

सदा दशहरे पर हम फेंकें
शब्दों के रावण पर बाण |
अपने उर का रावण मारो
इसमें है सबका कल्याण ||
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झूठ-कपट और द्वेष-भावना अहंकार को सब त्यागो |
लालच तृष्णा काले धन के पीछे सारे मत भागो |
ये रावण के बन्धु-बान्धव
इनसे पा लें सब परित्राण |
अपने उर का रावण मारो
इसमें है सबका कल्याण ||
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रावण की जैसी थी करनी वैसी उसकी भरनी थी |
माता सीता भवसागर की एक मात्र ही तरनी थी |
प्रभु की इच्छा किसको कैसे
जीवन से देना निर्वाण |
अपने उर का रावण मारो
इसमें है सबका कल्याण ||
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रावण के अच्छे गुण सीखो दुर्गुण को अपनाओ मत |
सरल पाप का रस्ता हो तो उस रस्ते पर जाओ मत |
सीख यही मिलती रावण से
बढ़े न पापों का परिमाण |
अपने उर का रावण मारो
इसमें है सबका कल्याण ||
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सदा दशहरे पर हम फेंकें
शब्दों के रावण पर बाण |
अपने उर का रावण मारो
इसमें है सबका कल्याण ||
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘ तुरंत ‘ बीकानेरी |

         

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