गुड़िया की विदाई

🌺गुड़िया बेटी की विदाई 🌺
गुड़िया देखे सपना , लागे सब ही अपना ।
मौज मस्ती से खेलना , सपने ही देखिये ।।

गुड़िया आये जो घर , पढ़ने में होशियार ।
बड़ी है वो होनहार , सपने में सोचिये ।।

गुड़िया खेले खिलौना , छोटा सा है बिछोना ।
मस्ती देख झूठा रोना , सपने से रुकिए ।।

गुड़िया हुयी सयानी , छोटी सी ये जिंदगानी ।
विवाह की परेशानी , सपने में रोईये ।।

गुड़िया की हुयी शादी , जीवन सुख आबादी ।
समाज दहेज़ वादी , सपने सुधारिए ।।

विदाई पर रुलाई , काहे आंसू भी गिरायी ।
घर सुन्दर बसाई, सपने सवारिये ।।

नव स्वप्न द्वार सजे, मंगल साज भी बजे ।
विदाई रस्म पे रोये ,सपने खिलाईये ।।

अनुपम उपहार , जीवन पथ संवार ।
बेटी जाये ससुराल , सपने हर्षायिये ।।
नवीन कुमार तिवारी ,अथर्व 🖌

         

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