चाहत

चाँदनी चमक लिए,चाहने की चाह लिए दिल में चाहत भरा,क्यों लिये चल रहीं। बाल तेरे काले काले,चाल तेरे हैं निराले नयनों में दिखे मुझे,ख्वाबो में पल रहीं। ओठ हैं गुलाबी रंग,बाल छूए गोर गाल भरा मन चंचलता,भावना नम रहीं। चेहरे के सभी अंग,आभा हैं संयोग ओज छोड़ती प्रकाश पुंज,ऐसा क्यों कर रहीं॥1॥ _____________© रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’

         

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