छाँव

*छाँव*
कहीं धूप कहीं छाँव, छोटा रहा मेरा गांव ।
आम नीम पेड़ छाँव ,बच्चे मस्त देखिये ।।1

खेल कूद जहाँ छांव , धूप खिले पूरे गाँव ।
बच्चे रहे थोक भाव ,बच्चे मस्ती सीखिये।।2

बड़े बूढ़े बैठे छाँव , हुक्का खींचे हिला पांव ।
श्वान आये दबे पांव , बच्चे मस्ती कीजिये ।।3

श्वान पूंछ खींच मान , छाँव देख सोये तान ।
बच्चे बड़े ये शैतान , बच्चे छाँव खोजिये ।।4
नवीन कुमार तिवारी,,

         

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