तम मीटे दीप जले

तम मीटे दीप जले , तम बढे दीप बुझे !
तम घने सब डरे , दीप ही जलाईये !!

दीप दान कर मान , शिक्षा दान कर ध्यान !
धन दान मत मान , दीप ही जलाईये !!

दीप जला अंतर्ध्यान , दीप बुझे मति श्याम !
दीप रहे कान्ति मान , दीप ही जलाईये !!

अमावस काली छाया , धन धान्य मोहमाया !
तम ज्ञान भ्रम आया , दीप ही जलाईये !!
नवीन कुमार तिवारी ,अथर्व

         

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