इंतजार एक रहा
अश्रुधार बह रहा
भूल खटकता रहा
एहसास मानिये
पुष्प सुवासित रहे
मधु अलंकृत रहे
सुर तरंगित रहे
एहसास जानिये
अहंकार मद आया
अहं ज्वार संग लाया
संग तंम तृष्णा छाया
एहसास चाहिए
सुप्रभात अलसाया
पढ़ चुका अब पाला
प्रेम ज्वार रहा हाला
एहसास करिए
नवीन कुमार तिवारी ,अथर्व