हरियाली ढूंढे गांव

हरियाली

कहीं धूप कहीं छावं , हरियाली ढूंढे गाँव ।
चलो पेड़ भी लगाव , धरा भी सजायिये ।।

धूप में छाँव खोजिये , मरू में पानी लाईये ।
ठंडी हवा भी चाहिए , पेड़ भी बचाईये।।

बूढ़े बुजुर्ग मानिये , इन्हें नहीं सताइए ।
सर पे छाँव चाहिए , हरियाली रखिये ।।

सूरज के धूप संग ,आनंद रहे उमंग ।
सुवासित हो तरंग ,पेड़ भी लगाईये ।।
नवीन कुमार तिवारी ,अथर्व

         

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