अंधेरा, तीरगी,तम

*अंधेरा, तीरगी,तम*
अंधेरा में रौशनी , करते कैसे पाप ।
रक्त पिपाशु पाल रखे ,कुकर्म करे निष्पाप ।।

जड़ चेतन मारे चले,कहते विकास बात ।
समान भाव आंख फिरे , किनके चिकने पात ।।

नवीन कुमार तिवारी,,

         

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