उल्लास

उल्लास

उल्लास काफूर हुआ , धाल मेल की बात ।
भानु मति कुनबा बनते, अमावस भरी रात ।

इधर उधर झूमत चली , ये मतवाली नार ।।
सजधज पहनती गहना ,कच्ची कलि कचनार ।

मोहिनी छवि मृग नयनी , दिखे रतनार भाल ।
मधु गीत गाये ललना ,खेले कुंतल जाल ।।

काँटों में खिलते रहे, मनो भाव उल्लास ।
पुलकित संसार रहते , पुष्प खिले विश्वास ।।
नवीन कुमार तिवारी,

         

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