एहसास

अश्क बहते रुक पड़ते,तड़पाती है याद ।
कुछ वक्त साथ बैठते , करते हैं फरियाद ।।

नैन मटका भूल चले ,होता क्या एहसास ।
दिल तोड़ खेलते रहे , होता यह परिहास ।।

गेंसु लट बिखरा फिरती ,लगाय नहीं कयास ।
मुख उदास किये दिखती , टूट गये विश्वास ।।
*नवीन कुमार तिवारी*

         

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