कंडील

*कंदील*
भूली बिसरी याद से, निकले कलम दवात ।
खंडहर होते शहरे , कर चले वारदात ।।

फानूस जला देखते, कौन करे फरियाद ।
कंडील करे रौशनी , घर जाने के बाद ।।

भभकती लौ दीपक की , लिपटी साया आज ।
घिसटती चली दामिनी ,,खुलते कैसे राज ।।

मौन प्रतिवाद कीजिये, घुड़कती नजर बाज ।
अलसाये लब शांत तो ,गिराये तभी गाज ।।
*नवीन कुमार तिवारी,,*

         

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