जय सिया राम

टेंट भीतर राम रहे , दिल कलप कलप जाय।
भक्त बन सत्ता बैठिये , राम भूल भूल आय ।।

राम जन्म ख़ुशी मानिये , हर बरस दिला याद ।
मंदिर कब बन पायगा,सत्ता बताये बाद ।।

मर्यादित बोल राम के, करते दिल में राज।
दिल में राम बसाइये,शुभ प्रभात है आज।।

राम बोल तर जाइये ,सत्ता कुर्सी जो पाय ।
टेंट फिर सजा आइये , कुर्सी अटल बन जाय।।
नवीन कुमार तिवारी,,,

         

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