तुरंत के दोहे (२०१८)

(१/२०१८)
मन निर्मल रखिये सदा , वाणी शहद समान |
जीतें सबका दिल सहज ,आनन रख मुस्कान ||
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(२/२०१८)
पाप कर्म से दूर रह, त्यागे निज अभिमान |
नर सुख पायेगा वही, जो यह रक्खे ध्यान ||
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(३/२०१८ )
अंतरतम की बात को , सुनें लगाकर ध्यान |
रोके मन, मत लीजिये , उसका फिर संज्ञान ||
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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