“दंभ नहीं करिये कभी” …

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दंभ नहीं करिये कभी , जाँचे मन का द्वार ।
अवगुन अपना त्यागिये , उचित बने व्यवहार ।।
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बार-बार के दरस में , कभी न होवे बोर ।
दिल की चोरी इश्क में , लड़का-लड़की चोर ।।
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ठौर नहीं ये चाह का , छोड़े चाह निशान ।
हृदय रखे जो धीर वो , सच में वो बलवान ।।
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प्रथम सुअवसर नार को , अब तो बूझें लोग ।
सब खा लेते बाद क्यूँ , माँ को मिलता भोग ।।
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बनता अपना जो नहीं , हुनर गये हैं हार ।
पाये कैसे खास को , बता जरा दो यार ।।
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खोजो ईश्वर संत में , संत देत सत ज्ञान ।
नहीं मिले जो संत तो , झूठा है सब मान ।।
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